श्री राम जानकी मंदिर ट्रस्ट
गुरसहायगंज
ट्रस्ट का इतिहास
श्री रामचंद्र जी महाराज विराजमान मंदिर, परगवां ट्रस्ट की स्थापना 17 मार्च 1882 को दो सगे भाइयों सेठ चिरौंजी लाल एवं सेठ उम्मेद राव द्वारा की गई थी I.
उनकी कोई संतान नहीं थी। उनके स्वामित्व में परगवां मौजा की जमींदारी भूमि तथा गुरसहायगंज में एक नील की कोठी थी, जहाँ श्री राम जानकी मंदिर भी स्थित था।
संतान न होने के कारण उन्होंने अपनी संपूर्ण संपत्ति मंदिर को समर्पित कर दी। ट्रस्ट डीड फर्रुखाबाद के माननीय जिला न्यायाधीश द्वारा लिखी गई, जिसके आधार पर आज भी ट्रस्ट का संचालन किया जाता है।
प्रारंभ में माननीय जिला न्यायाधीश द्वारा छ: ट्रस्टियों की नियुक्ति की गई थी। उनके बीच विवाद होने के कारण वर्ष 1911 में एक न्यायालयीन वाद (वाद संख्या 01 सन् 1911: बनवारी लाल एवं अन्य बनाम उल्फत राय एवं अन्य) दायर किया गया। वर्ष 1912 में इन छह ट्रस्टियों को हटा दिया गया और एक नई प्रशासनिक व्यवस्था बनाई गई।
इस व्यवस्था के अंतर्गत जिलाधिकारी को ट्रस्ट का अध्यक्ष नियुक्त किया गया तथा उनके द्वारा नामित तीन ट्रस्टी नियुक्त किए जाने का प्रावधान किया गया।
वर्तमान ट्रस्ट व्यवस्था
अध्यक्ष
(वित्त/राजस्व)
प्रभारी अधिकारी ट्रस्टी
ट्रस्ट के प्रमुख उद्देश्य
- भगवान की पूजा, भोग, आरती एवं प्रसाद की व्यवस्था
- नवरात्रि, राम नवमी, जन्माष्टमी, महाशिवरात्रि आदि पर्वों का आयोजन
- संतों, साधुओं एवं जरूरतमंदों हेतु निःशुल्क भोजन (सदाव्रत)
- शीत ऋतु में कंबल वितरण
